
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान की हाल ही में हुई शादी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस निकाह के खिलाफ फतवा जारी करते हुए इसे इस्लामी शरीयत के नजरिए से पूरी तरह ‘नाजायज’ बताया है।
मौलाना रजवी ने निकाह को बताया शरीयत के नियमों के खिलाफ
रविवार को फतवा जारी करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिए स्पष्ट नियम और कायदे निर्धारित हैं।
“इस्लाम में मुस्लिम पुरुष और गैर-मुस्लिम महिला के निकाह को लेकर शरीयत में स्पष्ट प्रावधान हैं। उमर अब्दुल्ला मुसलमान हैं और निधि राजदान गैर-मुस्लिम। ऐसे में बिना धर्म परिवर्तन के किया गया यह निकाह इस्लामी नजरिए से सही नहीं है।”
— मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
शादी से पहले धर्म परिवर्तन कराना चाहिए था
मौलाना ने तर्क दिया कि उमर अब्दुल्ला को शादी से पहले निधि राजदान का धर्म परिवर्तन कराना चाहिए था। उनके अनुसार, यदि धर्म परिवर्तन के बाद निकाह होता, तभी यह शरीयत की कसौटी पर जायज माना जाता।
सोशल मीडिया पर शादी की तस्वीरें साझा कर दी जानकारी
56 वर्षीय उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर अपनी शादी की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “शुक्रवार से एक नई यात्रा की शुरुआत हुई है।”
आपको बता दें कि यह दोनों की दूसरी शादी है। उमर अब्दुल्ला की पहली शादी पायल अब्दुल्ला से हुई थी।
नए राजनीतिक विवाद की आहट
एक तरफ जहां मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को शादी की बधाइयां मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बरेलवी धर्मगुरु के इस फतवे के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम धार्मिक नियमों’ पर एक नई बहस छिड़ गई है।


