
क्रीम और मॉइश्चराइजर में मिलाए जाने वाले सभी अल्कोहल नुकसानदायक नहीं होते, बल्कि इनमें से कई प्रकार के अल्कोहल त्वचा को नमी देने, उत्पाद को हल्का बनाने और जरूरी तत्वों को घोलने में महत्वपूर्ण काम करते हैं.
आज के समय में जब भी हम चेहरे या शरीर की देखभाल के लिए बाजार से कोई नया मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम खरीदते हैं, तो उसकी सामग्री सूची में अल्कोहल का नाम जरूर देखने को मिलता है. लेकिन विज्ञान और डर्मेटोलॉजी की दुनिया में इसके मायने पूरी तरह अलग हैं. किसी भी ब्यूटी प्रोडक्ट में अल्कोहल को केवल एक रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसके कई अलग-अलग प्रकार और उपयोग होते हैं. आइए आज हम आपको विस्तार से बताते हैं कि क्रीम और मॉइश्चराइजर में अल्कोहल क्यों मिलाया जाता है और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण छिपे हैं.
क्रीम-मॉइश्चराइजर में अल्कोहल मिलाने के कारण
त्वचा देखभाल से जुड़े उत्पादों में अल्कोहल का इस्तेमाल किसी एक मकसद से नहीं किया जाता है, बल्कि इसके कई तकनीकी और व्यावहारिक फायदे होते हैं. यह क्रीम के अंदर मौजूद जरूरी सक्रिय तत्वों यानी एक्टिव इंग्रीडिएंट्स को अच्छी तरह घुलने में मदद करता है. इसके अलावा, यह प्रोडक्ट की बनावट को इतना बेहतरीन बनाता है कि वह त्वचा पर लगाते ही बहुत आसानी से और एकसमान रूप से फैल जाता है. कई तरह के अल्कोहल क्रीम को चिपचिपा होने से बचाते हैं और उसे लगाने के बाद त्वचा पर जल्दी सुखाने में सहायक होते हैं. कुछ विशेष अल्कोहल उत्पादों में प्रिजर्वेटिव के रूप में भी काम करते हैं ताकि क्रीम लंबे समय तक खराब न हो.
इथेनॉल और अन्य अल्कोहल क्रीम को बनाते नॉन-स्टिकी
इथेनॉल जैसे कुछ खास प्रकार के अल्कोहल हवा में बहुत तेजी से वाष्प बनकर उड़ जाते हैं. जब ऐसे अल्कोहल युक्त मॉइश्चराइजर को त्वचा पर लगाया जाता है, तो वे तुरंत उड़ जाते हैं जिससे क्रीम लगाने के बाद चेहरे पर भारीपन महसूस नहीं होता है. यह तकनीक क्रीम को बेहद हल्का और नॉन-स्टिकी बनाने में मदद करती है. हेल्थकेयर विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटक केवल त्वचा को सुखाने का काम नहीं करता, बल्कि यह फॉर्मूलेशन को स्थिर रखकर बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीवों के विकास को रोकने में भी अहम सुरक्षा प्रदान करता है.



