
दिल के मरीजों के लिए संक्रामक रेस्पिरेटरी डिजीज और दूसरी गंभीर बीमारियों के खिलाफ वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलाजी ने इस बारे में गाइडलाइन जारी की है। इन वैक्सीन्स में कोविड- 19 इन्फ्लूएंजा निमोनिया जैसी बीमारियां शामिल हैं। आइए जानें कौन-सा टीका लगवाना जरूरी है और कब।
अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलाजी (एसीसी) ने जारी की नई सिफारिशें
केवल 30 प्रतिशत रोगी ही करते हैं टीकाकरण स्थिति का मूल्यांकन
अलग-अलग उम्र वर्ग के लिए अलग-अलग टीका आवश्यक
दिल की बीमारियों से पीड़ित वयस्कों को कोविड- 19, इन्फ्लूएंजा, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस, निमोनिया, हर्पीज जोस्टर (शिंगल्स) और अन्य बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण कराना जरूरी है, ये नई सिफारिशें अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलाजी (एसीसी) द्वारा की गई हैं। इस मार्गदर्शन में प्रत्येक टीके की सिफारिश के लिए विस्तृत साक्ष्य और चिकित्सकों व रोगियों के बीच संवाद को मार्गदर्शित करने के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर भी शामिल हैं।
विज्ञानी पाल हाइडेनरिच ने कहा, “संक्रामक रेस्पिरेटरी डिजीज और अन्य गंभीर बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण दिल के मरीजों के लिए बेनहद जरूरी है, लेकिन यह सुनिश्चित करने में बाधाएं हैं कि लोग जानें कि उन्हें कौन से टीके लगवाने चाहिए और कितनी बार लगवाने चाहिए।”
उन्होंने जोड़ा कि इस दस्तावेज के माध्यम से हम चिकित्सकों को इन चर्चाओं को करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं और अपने रोगियों को टीकाकरण को एक मानक रोकथाम और उपचार योजना के हिस्से के रूप में प्रबंधित करने में मदद करना चाहते हैं। जिसके सुरक्षा की दिशा में ऐहतियात बरता जा सके।
टीकों का सही चयन जरूरी
अध्ययन के दौरान टीकों के चयन को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया है। मसलन, सभी वयस्कों के लिए वार्षिक फ्लू टीका हृदय संबंधी बीमारी, हृदय संबंधी मृत्यु दर और सभी कारणों से मृत्यु को कम करने के लिए अनुशंसित है । निमोकोकल टीका 19 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हृदय रोगियों के लिए अनुशंसित है जो निमोनिया और मेनिनजाइटिस से सुरक्षा कर सकता है।
वहीं शिंगल्स का टीका 50 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों के लिए अनुशंसित है ताकि संक्रमण के समय स्ट्रोक और दिल के दौरे के बढ़ते जोखिम से सुरक्षा मिल सके। एसीसी ने यह भी अनुशंसा की है कि हृदय रोगियों को मौसमी कोविड टीका और 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वयस्कों एवं 50 से 74 वर्ष के हृदय रोगियों के लिए आरएसवी टीका प्राप्त करना चाहिए। इसका उद्देश्य उन निचले श्वसन रोगों से सुरक्षा करना है जो अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
30 प्रतिशत रोगी ही करते हैं टीकाकरण स्थिति का मूल्यांकन
शोध में पाया गया कि हृदय रोगियों को श्वसन वायरस के संपर्क में आने पर संक्रमण का उच्च जोखिम होता है और अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु सहित प्रतिकूल परिणामों का भी उच्च जोखिम होता है जबकि टीके इन जोखिमों को कम करने में प्रभावी हैं। अध्ययन में सामने आया कि केवल 30 प्रतिशत प्राथमिक देखभाल चिकित्सक अपने रोगियों की टीकाकरण स्थिति का मूल्यांकन क्लिनिक की विजिट के दौरान करते हैं।