पहाड़ बचाने के लिए यूथ कांग्रेस का ‘अरावली सत्याग्रह’, 7 जनवरी से शुरू होगी 1,000 KM की यात्रा

नेशनल यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने पहले भारत की शाश्वत संस्कृति को प्रदूषित किया और अब देश के पर्यावरण को बर्बाद करने पर तुली हुई है.

देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली को बचाने के लिए नेशनल यूथ कांग्रेस अगले साल की शुरुआत में 7 जनवरी से ‘अरावली सत्याग्रह’ की शुरुआत करने जा रही है. ये सत्याग्रह गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरेगा और करीब 1,000 किलोमीटर की यात्रा तय करेगा, जो 20 जनवरी, 2026 तक चलेगी.

नेशनल यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पहले भारत की शाश्वत संस्कृति को प्रदूषित किया और अब देश के पर्यावरण को बर्बाद करने पर तुली हुई है. उन्होंने कहा, “अरावली डेढ़ अरब साल पुरानी है. यह सिर्फ पहाड़ नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत का सुरक्षा कवच हैं. इन्हें खत्म करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.”

सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का आरोप

यूथ कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को प्रस्ताव दिया कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली की परिभाषा से बाहर कर दिया जाए. इसी 100 मीटर के पैंतरे का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

हाल ही में राजस्थान सरकार ने 50 नई माइनिंग लीज जारी की हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को नजरअंदाज किया गया. इतना ही नहीं, साल 2010 से बंद पड़ी खनन गतिविधियों को भी बिना किसी वैध प्रस्ताव के दोबारा शुरू कर दिया गया है.

यूथ कांग्रेस ने रखी तीन प्रमुख मांगें

यूथ कांग्रेस का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल रेयर अर्थ मिनरल्स की सीमित माइनिंग की बात कही थी, लेकिन सरकार इसका फायदा उठाकर संसाधनों को अपने करीबी लोगों को सौंप रही है. निकोबार द्वीप, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हुए फैसलों का भी हवाला दिया गया. जिसके रोकने के लिए नेशनल यूथ कांग्रेस ने तीन प्रमुख मांगें रखीं हैं. जिसमें,

  • 100 मीटर की ऊंचाई वाला नियम पूरी तरह खत्म किया जाए.
  • पूरे अरावली क्षेत्र को क्रिटिकल इकोलॉजिकल जोन घोषित किया जाए.
  • अवैध और मनमानी खनन गतिविधियों पर तुरंत रोक लगे.

इस सत्याग्रह यात्रा में कांग्रेस नेता, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता, पर्यावरणविद और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे. यात्रा हाइब्रिड मोड में होगी ताकि देशभर से लोग इससे जुड़ सकें.

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