
आयोग के प्रमुख गौरी बहादुर कार्की ने कहा कि पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ओली से स्पष्टीकरण लेने की तैयारी चल रही है.
नेपाल में आठ-नौ सितंबर के Gen-Z आंदोलन के दौरान बल के अत्यधिक इस्तेमाल की जांच के लिए नियुक्त किया गया एक आयोग अपदस्थ प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को स्पष्टीकरण के लिए बुलाएगा. अधिकारियों ने गुरुवार (1 जनवरी, 2025) को यह जानकारी दी.
काठमांडू में आठ सितंबर को ओली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कम से कम 19 युवा पुलिस गोलीबारी में मारे गए थे. पूरे देश में दो दिनों तक चली अशांति में 77 लोगों की जान चली गई थी. ‘ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW)’ और अन्य संबंधित संगठनों ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलाबारी समेत असंगत और गैरकानूनी बल का इस्तेमाल किया. इस आंदोलन के कारण ओली की गठबंधन सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा था.
आयोग के प्रमुख गौरी बहादुर कार्की ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री ओली से स्पष्टीकरण लेने की तैयारी चल रही है.
बहादुर कार्की ने कहा कि आयोग 21 जनवरी की विस्तारित समय सीमा के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की योजना के अनुसार काम कर रहा है. तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन 21 सितंबर को मंत्रिमंडल के फैसले के माध्यम से किया गया था. हालांकि, ओली ने आयोग की वैधता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वह उसके सामने पेश नहीं होंगे.
आयोग ने नेपाली कांग्रेस नेता लेखक पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध भी हटा दिए हैं. उनपर काठमांडू घाटी छोड़ने एवं विदेश जाने पर पाबंदी लगायी थी. लेखक ने सोमवार को आयोग के समक्ष कहा था कि वह आठ सितंबर की मौतों और अन्य नुकसान के लिए पूरी नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं. हालाकि, उन्होंने दावा किया कि नौ सितंबर को देश भर में हुई तोड़फोड़ और आगजनी कोई स्वतःस्फूर्त नहीं थी, बल्कि ‘लोकतंत्र और राष्ट्र के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश’ का परिणाम थी.



