दशहरा भाषण में बोले मोहन भागवत- ‘बांग्लादेश की तरह भारत में भी हुई रिजीम चेंज की कोशिश, पर यहां नहीं होंगे कामयाब’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में देशवासियों को संबोधित किया। अपने वार्षिक भाषण में मोहन भागवत ने देश-विदेश के राजनीतिक हालात, हिंसक विरोध प्रदर्शनों और वैश्विक साजिशों पर बेबाक राय रखी।

मोहन भागवत ने देश में हुए हालिया प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसी स्थिति पैदा कर ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) कराने की कोशिशें की गईं, लेकिन मजबूत नेतृत्व और सजग समाज की वजह से ये साजिशें नाकाम हो गईं।

‘रिजीम चेंज से कभी समाज या देश का भला नहीं हो सकता’

विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, “दुनिया भर में अपने स्वार्थों को साधने वाली ताकतें इस तरह के खेल रचती हैं। फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में जो कुछ भी हुआ या हो रहा है, वह सब प्रायोजित (किया-कराया) है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ ताकतों का मानना है कि ‘रिजीम चेंज’ करने से परिस्थितियां बदल जाती हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा कभी नहीं होता। सत्ता बदलने से देश या समाज को कभी फायदा नहीं होता, बल्कि स्वार्थी तत्व और उनके पिट्ठू ही हर जगह प्रभावी बने रहते हैं।

‘भारत, हिंदू और संघ को तोड़ने का प्रयास, पर लक्ष्य नहीं होगा पूरा’

मोहन भागवत ने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत अब ऐसी शक्तियों का ‘परम लक्ष्य’ बन चुका है।

“भारत में भी ऐसे अराजक प्रयास चल रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों में भारत ने जिस प्रकार की दृढ़ नीतियां अपनाई हैं और हमारे मजबूत नेतृत्व ने जिस मजबूती से देश को आगे बढ़ाया है, उससे विदेशी शक्तियों के खेल बंद हो गए हैं। वे भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।” — मोहन भागवत, सरसंघचालक (RSS)

उन्होंने स्वीकार किया कि देश अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है और विकास की राह में कुछ समस्याएं रहेंगी, लेकिन भारत के युवा अपने देश के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी वजह से भारत में अन्य देशों जैसे हालात कभी नहीं बन सकते।

नेपाल त्रासदी पर बोले: संतुलित और समग्र विकास की जरूरत

भाषण के दौरान मोहन भागवत ने हाल ही में नेपाल में आई भयंकर त्रासदी और जन-धन के नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों की जान जाने के मूल में हिमालयी क्षेत्र का एकांगी और असंतुलित विकास मॉडल है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमालय का दायरा भारत, तिब्बत, भूटान और चीन जैसे कई देशों तक फैला है। ऐसे संवेदनशील पर्यावरण वाले क्षेत्रों में विकास की एक समग्र और संतुलित दृष्टि (Balanced Development Vision) का निर्माण होना बेहद आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से मानव जीवन को बचाया जा सके।

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