
Builders Fraud Supreme Court News: देश में घर खरीदारों के साथ हो रही धोखाधड़ी और बिल्डरों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से उन लाखों होमबॉयर्स (Homebuyers) को बड़ी उम्मीद जगी है, जो सालों से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं और सिस्टम से निराश हो चुके हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने उठाए कड़े सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए सवाल किया— “क्या अब ऐसा कोई बिल्डर बचा है, जिसके खिलाफ घर खरीदारों की शिकायत सामने न आई हो?” कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
17 साल से नहीं मिला कब्जा, 80 पार के बुजुर्गों का दर्द
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद एमिकस क्यूरी ने एक बेहद मार्मिक और गंभीर मामला कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे कोर्ट की कार्रवाई की खबर लोगों तक पहुंच रही है, नए पीड़ित सामने आ रहे हैं:
- साल 2009 की बुकिंग: 80 वर्ष से अधिक उम्र के 5 वरिष्ठ नागरिकों ने साल 2009 में कुल 7 फ्लैट खरीदे थे।
- लंबा इंतजार: लगभग 17 साल बीत जाने के बाद भी इन बुजुर्गों को उनके फ्लैट्स का कब्जा नहीं मिला है।
- गंभीर स्थिति: इस उम्र में घर न मिलने से ये बुजुर्ग दर-दर भटकने को मजबूर हैं और कोर्ट से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) की भूमिका पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) से लंबित मामलों की पूरी सूची दाखिल करने को कहा था, लेकिन इन बुजुर्ग घर खरीदारों का मामला उस लिस्ट में शामिल ही नहीं किया गया।
एमिकस क्यूरी ने आरोप लगाया कि:
- RP अब घर खरीदारों के नए दावों को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं।
- कोर्ट के सामने मामलों की सही और पूरी तस्वीर पेश नहीं की जा रही है।
- कुछ प्रोजेक्ट्स को इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (IRP) से बाहर क्यों रखा गया, RP को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
घर खरीदारों के लिए क्यों अहम है यह खबर?
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि शीर्ष अदालत बिल्डरों और लापरवाह अधिकारियों (RP) पर नकेल कसने के मूड में है। जिन लोगों के पैसे सालों से फंसे हैं और जो बिल्डर्स की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, उनके लिए यह मामला एक बड़ी कानूनी उम्मीद बनकर उभरा है।



