
Uttarakhand News: खेल जगत में भी उत्तराखंड ने साल 2025 में अपनी अलग पहचान बनाई. राज्य ने 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन कर अपनी आयोजन क्षमता का परिचय दिया.
साल 2025 उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के कई फैसले न केवल प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं का केंद्र बने. समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से लेकर राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन और ऑपरेशन कालनेमि जैसे अभियानों ने सरकार की नीतियों और मंशा को स्पष्ट रूप से सामने रखा.
साल की शुरुआत 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू होने के साथ हुई. इसके साथ ही उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बन गया, जिसने नागरिक कानूनों में समानता की दिशा में ऐतिहासिक पहल की. यूसीसी के लागू होने को सामाजिक सुधार और कानूनी एकरूपता की दिशा में बड़ा कदम माना गया, जिसने देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम की.
खेल जगत में भी उत्तराखंड ने वर्ष 2025 में अपनी अलग पहचान बनाई. राज्य ने 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन कर अपनी आयोजन क्षमता का परिचय दिया. उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 103 पदक हासिल किए और पदक तालिका में सातवां स्थान प्राप्त किया. यह उपलब्धि राज्य में खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों को मिल रहे प्रोत्साहन का परिणाम मानी गई.
आर्थिक मोर्चे पर भी वर्ष 2025 धामी सरकार के लिए अहम रहा. दिसंबर 2023 में देहरादून में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन में हुए 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से दिसंबर 2025 तक करीब एक लाख करोड़ रुपये की ग्राउंडिंग हो चुकी है. इससे राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे को मजबूती मिली.
कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट खेती योजना को आगे बढ़ाया
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए सरकार ने मिलेट मिशन, कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट खेती योजना जैसी पहलों को आगे बढ़ाया. मिलेट मिशन के तहत 11 पर्वतीय जिलों के लिए 134.89 करोड़ रुपये की कार्य योजना को स्वीकृति दी गई. इस योजना में मण्डुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीना उत्पादक किसानों को बीज और जैव उर्वरकों पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा.
कीवी नीति के अंतर्गत 2030-31 तक नौ पर्वतीय जिलों में कीवी उद्यान स्थापना हेतु प्रति एकड़ 12 लाख रुपये की लागत पर 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 17,500 किसान लाभान्वित होंगे. वहीं ड्रैगन फ्रूट खेती को उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, देहरादून और टिहरी में आधुनिक तकनीक से बढ़ावा दिया जा रहा है.
अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक किया लागू
शिक्षा क्षेत्र में सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक लागू किया. इसके तहत अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के लिए एक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जो उन्हें मान्यता देगा. इसके बाद प्रदेश के सभी पंजीकृत मदरसों में उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा.
अवैध रूप से रह रहे 19 बांग्लादेशी नागरिक किए गिरफ्तार
धर्म और आस्था की आड़ में होने वाली ठगी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए 10 जुलाई से प्रदेशभर में ऑपरेशन कालनेमि शुरू किया गया. इस अभियान के तहत अब तक हजारों लोगों का सत्यापन किया गया, 724 मुकदमे दर्ज हुए और 511 गिरफ्तारियां की गईं. इसके साथ ही अवैध रूप से रह रहे 19 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है.
शहीद सैनिकों के आश्रितों के लिए अनुग्रह राशि बढ़ाई
वर्ष 2025 में सरकार ने कई अन्य बड़े फैसले भी लिए. 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया गया. राज्य के इतिहास में पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया गया. शहीद सैनिकों के आश्रितों के लिए अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई. सभी 13 जिलों में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों की शुरुआत हुई. स्कूली पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन को शामिल करने का निर्णय लिया गया. उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मेगा इंडस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति-2025 को मंजूरी मिली. देहरादून में रिस्पना और बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं तथा सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे परियोजना को भी स्वीकृति मिली.
चारधाम यात्रा 2025 में 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में चारधाम यात्रा 2025 के दौरान 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. यात्रा मार्ग पर 49 स्थायी चिकित्सा इकाइयां सक्रिय की गईं और केदारनाथ धाम में 17 बेड का अस्पताल शुरू किया गया, जिसे वर्ष की बड़ी उपलब्धि माना गया. कुल मिलाकर वर्ष 2025 धामी सरकार के लिए निर्णयों, योजनाओं और अभियानों का ऐसा वर्ष रहा, जिसने उत्तराखंड की प्रशासनिक दिशा और विकास मॉडल को नए आयाम दिए.



