डिजिटल गोल्ड खरीदने का सोच रहे हैं? ठहरिए! फंस सकता है पैसा अगर कर बैठेंगे ये गलती

Digital Gold: डिजिटल गोल्ड में निवेश हाल के सालों में खूब पॉपुलर हुआ है, लेकिन कई बार हम निवेश करने से इसके रिस्क से अनजान रह जाते हैं इसलिए डिजिटल गोल्ड में पैसा बेहद सोच-समझकर लगाना चाहिए. डिजिटल गोल्ड में निवेश हाल के सालों में निवेश का एक आसान और पॉपुलर तरीका बन गया है. यह एक ऐसा ऑनलाइन जरिया है, जिसमें आप 10 रुपये से लेकर 100 रुपये का भी सोना खरीद सकते हैं. फोनपे, पेटीएम, गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म्स MMTC-PAMP और Augmont जैसी कंपनियों के साथ मिलकर डिजिटल गोल्ड में निवेश की सुविधा दे रहे हैं. इसके अलावा, तनिष्क जैसे कई ज्वेलरी ब्रांड्स भी निवेशकों को डिजिटल गोल्ड में निवेश करने का ऑप्शन दे रहे हैं. 

डिजिटल गोल्ड क्यों हो रहा पॉपुलर?

डिजिटल गोल्ड में इन्वेस्ट करना आसान है. इसमें आप अलग-अलग मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मिनटों में सोना खरीद या बेच सकते हैं. इसमें दिलचस्पी बढ़ने की एक और वजह यह है कि आप घर बैठे आराम से निवेश कर सकते हैं. इसकी एक और खासियत यह है कि इसमें सोना को किसी सुरक्षित जगह पर रखने की चिंता भी नहीं रहती है. यह उनके लिए बेस्ट है, जो सोने की बढ़ती कीमत का फायदा उठाना चाहते हैं. हालांकि, इसमें रिस्क भी है. गलत प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने या नियमों को नजरअंदाज करने से आपका पैसा फंस सकता है. अगर आपने डिजिटल गोल्ड में इन्वेस्ट करते समय सावधान नहीं बरती, तो आपको भारी नुकसान हो सकता है इसलिए इन्वेस्ट करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है जैसे कि प्लेटफॉर्म लीगल हैया नहीं, कंपनी की पॉलिसी क्या है वगैरह. 

हर किसी पर न करें भरोसा

डिजिटल गोल्ड कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वॉलेट ऐप पर मिलता है, लेकिन आप हर किसी पर भरोसा नहीं कर सकते हैं. कुछ प्लेटफॉर्म सिर्फ बिचौलिए का काम करते हैं और उनके पास गोल्ड स्टॉक नहीं होते हैं. ऐसे में अगर कंपनी का सर्वर डाउन हो जाता है या प्लेटफॉर्म किसी पचड़े में फंस जाए, तो आपका निवेश डूब सकता है. इन्वेस्ट करने से पहले यह देखना जरूरी है कि कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया या मार्केट रेगुलेटर SEBI से अप्रूव्ड है या नहीं. हमेशा Augmont, MMTC-PAMP या सेफगोल्ड जैसी जानी-मानी कंपनियों पर ही भरोसा करें. हाल ही में SEBI ने इसे लेकर निवेशकों को चेतावनी भी दी है. सेबी का कहना है कि पेटीएम, गूगल पे, फोन पे जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल गोल्ड खरीदा तो जा सकता है, लेकिन डिजिटल गोल्ड किसी रेगुलेशन के तहत नहीं आता है. ये सिक्योर नहीं होते हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव होते हैं इसलिए अगर प्लेटफॉर्म डिफॉल्ट हुआ, तो सेबी उनकी मदद नहीं कर पाएगी. 

टाइम पीरियड का रखें ख्याल

बहुत से लोग डिजिटल गोल्ड को लंबे समय तक रखते हैं, लेकिन उन्हें इसकी लिमिट और चार्ज के बारे में पता नहीं होता है. कुछ प्लेटफॉर्म आपको सिर्फ 5 साल तक ही सोना स्टोर करने की इजाजत देते हैं. उसके बाद आपको या तो फिजिकल डिलीवरी लेनी होगी या इसे बेचना होगा.

डिलीवरी में टैक्स, मेकिंग चार्ज और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च शामिल होता है. इससे आपका रिटर्न कम हो सकता है इसलिए अगर आप डिजिटल गोल्ड में इन्वेस्ट कर रहे हैं, तो सबसे पहले यह तय करें कि यह शॉर्ट-टर्म प्लान है या लॉन्ग-टर्म. आप गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे ऑप्शन भी चुन सकते हैं क्योंकि वे सरकारी सुरक्षा और ब्याज दोनों देते हैं.


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