
पंजाब प्राइवेटली मैनेज्ड एफिलिएटेड एंड पंजाब गवर्नमेंट एडेड कॉलेज पेंशनरी बेनिफिट्स स्कीम 18 दिसंबर, 1996 को जारी की गई थी। हालांकि, अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। पंजाब में 1996 में जारी की गई एक योजना अब तक लागू नहीं हो पाई है। 28 साल बाद भी यह योजना नहीं लागू होने पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई है और कहा है कि अगर इस मामले में जल्द ही सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो कोर्ट योजना के लाभार्थियों को आर्थिक मदद देने का आदेश दे सकता है। जस्टिस अभय ओका की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि अदालतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
पंजाब सरकार के ढुलमुल रवैये को शर्मनाक करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से बार-बार कोर्ट को आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अदालत ने मुख्य सचिव और एक अन्य अधिकारी को अवमानना नोटिस जारी किया है।
क्या है मामला?
पंजाब सरकार ने 1996 में पंजाब प्राइवेटली मैनेज्ड एफिलिएटेड एंड पंजाब गवर्नमेंट एडेड कॉलेज पेंशनरी बेनिफिट्स स्कीम जारी की थी, लेकिन यह योजना कभी शुरू नहीं हुई। बाद में इस योजना को बंद कर दिया गया, लेकिन सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया कि याचिका लगाने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। इसके बाद हाईकोर्ट को दो बार प्रशासन की तरफ से आश्वासन दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को लाभ मिलेगा, लेकिन अब तक किसी को मदद नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है और अब कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है।
अगली सुनवाई 4 अप्रैल को
बहस के दौरान, अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा द्वारा किए गए कुछ हाथों के हाव-भावों पर भी आपत्ति जताई, जिसके बाद पंजाब के महाधिवक्ता ने माफ़ी मांगी। सिंह ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा, लेकिन अदालत ने अवमानना नोटिस जारी किया और इस केस में सुनवाई के लिए अगली तारीख 4 अप्रैल तय की गई है।