108 सेवा बनी उत्तराखंड की ढाल

उत्तराखंड के पर्वतीय, दुर्गम और मौसम की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड जैसे राज्य में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना एक कठिन कार्य है, किंतु 108 सेवा ने प्रशासनिक प्रतिबद्धता, तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षित मानव संसाधन के बल पर इस चुनौती को अवसर में बदला है। यह प्रेस नोट 108 आपातकालीन सेवा की पाँच-वर्षीय यात्रा, उपलब्धियों, आँकड़ों, सुधारों और भविष्य की दिशा का विस्तृत एवं तथ्यपरक विवरण प्रस्तुत करता है।

संकट की घड़ी में जीवनरेखा Uttarakhand Health

108 आपातकालीन सेवा राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए आपदा और संकट की घड़ी में जीवनरेखा के समान है। सड़क दुर्घटनाएँ, हृदयाघात, प्रसव संबंधी आपात स्थितियाँ, गंभीर बीमारियाँ, प्राकृतिक आपदाएँ अथवा भीड़भाड़ वाले धार्मिक व राष्ट्रीय आयोजन—हर परिस्थिति में यह सेवा 24×7 तत्परता के साथ सक्रिय रहती है। बीते पाँच वर्षों में 108 सेवा का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल तक पहुँचाना भर नहीं रहा, बल्कि “गोल्डन ऑवर” के भीतर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराकर जीवन रक्षा सुनिश्चित करना इसकी कार्यसंस्कृति का मूल आधार बना है।

कोविड काल की चुनौती और सेवा की परीक्षा

वर्ष 2020-21 में 108 सेवा के अंतर्गत कुल 1,06,768 आपात मामले दर्ज किए गए। यह वह दौर था जब कोविड-19 महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव बना दिया था। सीमित संसाधनों और अत्यधिक मांग के बावजूद 108 सेवा ने निरंतर कार्य करते हुए राज्यभर में आपात स्वास्थ्य सहायता सुनिश्चित की।

2021-22: मामलों में तेज़ वृद्धि, जिम्मेदारी में इज़ाफ़ा

वर्ष 2021-22 में आपात मामलों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह आँकड़ा 1,58,070 तक पहुँच गया। कोविड संक्रमण की दूसरी लहर, गंभीर मरीजों की संख्या में वृद्धि, ऑक्सीजन सपोर्ट और अस्पताल रेफरल की बढ़ी मांग ने 108 सेवा की कार्यक्षमता की वास्तविक परीक्षा ली, जिसमें सेवा पूरी तरह सफल रही।

2022-23: सर्वाधिक मामलों का वर्ष

वर्ष 2022-23 में 1,62,301 आपात मामलों के साथ पाँच वर्षों का सर्वाधिक आंकड़ा दर्ज हुआ। महामारी के बाद उत्पन्न जटिल स्वास्थ्य स्थितियों, पुरानी बीमारियों के गंभीर मामलों और सामान्य आपात स्थितियों को 108 सेवा ने समान दक्षता से संभाला।

2023-24 और 2024-25: सकारात्मक गिरावट का संकेत

इसके बाद वर्ष 2023-24 में आपात मामलों की संख्या घटकर 1,51,276 और 2024-25 में 1,38,369 रह गई। यह कमी किसी भी प्रकार की कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों, समय पर प्राथमिक उपचार, स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों की मजबूती और कॉल ट्रायजिंग प्रणाली की सफलता को दर्शाती है।

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