
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि राज्य में केवल मराठी भाषा अनिवार्य होगी, जबकि अन्य भारतीय भाषाएं वैकल्पिक रहेंगी। उन्होंने कहा कि मराठी सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की आत्मा है।
मराठी को बढ़ावा देने का संकल्प
फडणवीस ने कहा कि सरकार मराठी भाषा के संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है और इसे पूरे भारत में लोकप्रिय बनाने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि पंतप्रधान नरेंद्र मोदी ने मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिया है, और अब इसे व्यापक लोकमान्यता दिलाने का समय है।
विदेशी भाषाओं का स्वागत, भारतीय भाषाओं का सम्मान
फडणवीस ने कहा कि हम अंग्रेजी, फ्रांसिसी और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए और अन्य भारतीय भाषाओं को भी बढ़ावा देना चाहिए।
शिक्षा में मराठी की भूमिका
फडणवीस ने कहा कि मराठी शिक्षा में अनिवार्य होगी, और अन्य भाषाओं को वैकल्पिक रूप से पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो यह तय करेगी कि अन्य भाषाएं किस कक्षा से शुरू की जाएंगी।



