
जर्मनी और भारत आठ अरब डॉलर (करीब 72 हजार करोड़ रुपये) के पनडुब्बी निर्माण सौदे को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यह जर्मनी के साथ भारत का सबसे बड़ा रक्षा समझौता होगा। जर्मनी पहली बार पनडुब्बी उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी करेगा। पनडुब्बियों का निर्माण जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स जीएमबीएच और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लि. मिलकर करेंगी।
फ्रांस से पनडुब्बी खरीदने की योजना हो सकती है रद्द
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले सप्ताह जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत आएंगे। भारतीय नौसेना के पास अभी एक दर्जन पुरानी रूसी और छह नई फ्रांसीसी पनडुब्बियां हैं। केंद्र के सूत्रों ने बताया कि अगर जर्मनी संग सौदा हो जाता है, तो फ्रांस से तीन और पनडुब्बी खरीदने की योजना भारत रद्द कर देगा। जर्मन सरकार के प्रवक्ता ने बताया, मर्ज सोमवार को गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। मर्ज इस बातचीत का इस्तेमाल यूरोपीय संघ व भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर व्यापक वार्ता को गति देने के लिए भी करेंगे। जर्मन कंपनियों के कई सीईओ भी आ रहे हैं।
हिंद महासागर में पुख्ता होगी निगरानी
सूत्रों के मुताबिक, नई पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन प्रणाली लगाई जाएगी। इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ेगी और वे डीजल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्सन की तुलना में अधिक समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी। ये पनडुब्बियां हिंद महासागर क्षेत्र के विशाल जलक्षेत्र में निगरानी क्षमता को बढ़ाएंगी, क्योंकि चीन वहां अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी होगी बात
जर्मन सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार को गुजरात में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओँ की बातचीत में भारत यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा होगी। जर्मन चांसलर के साथ जर्मनी की कई कंपनियों के सीईओ भी भारत दौरे पर आ रहे हैं।



