उत्तराखंड परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराना नहीं होगा आसान, CM धामी का नई नियमावली लाने का ऐलान

Uttarakhand News: सीएम धामी ने कहा कि बीते कुछ सालों में परिवार रजिस्टर में बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आई हैं, ऐसे लोगों के नाम रजिस्टर में मिले जिनका पहले कोई अस्तित्व नहीं था. उत्तराखंड में अब से परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अब पहले जैसी आसान नहीं रहेगी. सीमावर्ती और शहरी क्षेत्रों में अवैध बसावट, फर्जीवाड़े और बढ़ती अनियमितताओं के चलते सरकार नई नियमावली बनाने जा रही है. इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संकेत दिए हैं कि परिवार रजिस्टर से जुड़े मौजूदा नियम कमजोर और अस्पष्ट हैं, जिनका दुरुपयोग हो रहा है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि बीते कुछ सालों में परिवार रजिस्टर में बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आई हैं, जो राज्य के हित में नहीं हैं. खास तौर पर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी का कोटद्वार, टिहरी का मुनिकीरेती, चंपावत का बनबसा और टनकपुर जैसे क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने की स्थिति बन रही है. 

परिवार रजिस्टर में अनियमितता पर सरकार सख्त

सीएम धामी ने कहा कि इन इलाकों में ऐसे लोगों के नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज पाए गए हैं, जिनका पहले वहां कोई अस्तित्व नहीं था. कुछ स्थानों पर लोग स्थानीय निवासियों के नाम पर प्लॉटिंग कर रहे हैं, जिससे बाहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है. यह स्थिति भविष्य के लिए चुनौती बन सकती है. 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भावी पीढ़ी को सुरक्षित उत्तराखंड देना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा. 

शासन के अधिकारियों के अनुसार परिवार रजिस्टर में दर्ज नामों की संख्या में असामान्य वृद्धि हुई है. कई मामलों में नाम दर्ज करते समय संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं पाए गए. मौजूदा व्यवस्था में नाम दर्ज करने से पहले समुचित जांच-पड़ताल नहीं हो पा रही है, जिसका फायदा उठाकर फर्जी प्रविष्टियां की जा रही हैं. 

उत्तराखंड में नई नियमावली लाने की तैयारी

वर्तमान नियमों में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए केवल ‘निवासी’ होने की शर्त है. लेकिन, यह स्पष्ट नहीं है कि व्यक्ति कितने समय से उस क्षेत्र का निवासी होना चाहिए. नई नियमावली में इस परिभाषा को स्पष्ट किया जाएगा, ताकि भ्रम और दुरुपयोग की गुंजाइश कम हो सके.

इसके अलावा सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत तीन दिन के भीतर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का प्रावधान भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है, क्योंकि इतनी कम अवधि में समुचित जांच संभव नहीं हो पाती. प्रस्तावित बदलावों के तहत नाम जोड़ने की समय सीमा बढ़ाई जाएगी, ताकि दस्तावेजों और तथ्यों की सही तरीके से पड़ताल की जा सके. साथ ही परिवार रजिस्टर के प्रपत्र में नए कॉलम जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है.

कुल मिलाकर सरकार परिवार रजिस्टर की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सख्त और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाने जा रही है ताकि अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखा जा सके. 

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